Without the power of conscience, can we properly use any other power.

Without the power of conscience, can we properly use any other power like physical power, money power, relationships power?

Face trouble

There lived a carpenter in a village.  He was very strong in body and mind.

One day, a rich man from a nearby town invited him to his house to get furniture made.

When the work there was over, it was evening while returning.  The bus dropped it outside the village.  He stifled a bag of money he had received for work and put on a shawl to avoid the cold.

He left silently towards home through the deserted road.  After going some distance, suddenly he was stopped by a robber.

The robber was weaker in body than the carpenter, but his weakness was covered by his gun.

Now when the carpenter saw him in front, the robber said, whatever you have, give me all, otherwise I will shoot you.

Hearing this, the carpenter handed over the bundle to the robber and said, okay, you keep this money, but what will I say to my wife after reaching home.  She will understand that I must have spent the money in gambling.

You do one thing, pierce a hole in my cap with the bullet of your gun so that my wife is convinced of the robbery.

The robber gracefully shot a gun and pierced the cap.  Now when the robber started leaving, the carpenter said, do one more thing, so that the wife can be sure that the gang of robbers has robbed me together.  Otherwise my wife will consider me a coward.  You should also make four or five holes in this shawl.” The robber happily pierced the shawl also by firing several bullets.

After this the carpenter also removed his coat and said, make a hole or two in it too so that all the villagers can be sure that I had struggled a lot.

The robber said on this, just do it now.  The bullets in this gun have also run out.

On hearing this, the carpenter went ahead and caught the robber and said, I wanted the same thing.  Your only strength was this gun.  Now this too is empty.  Now you can’t put any pressure on me.  Quietly give my bundle back to me, otherwise..

On hearing this, the robber was blown away and he immediately returned the bundle to the carpenter and ran away saving his life.

The power of the carpenter came in handy when he used his discretion power properly.

Our discretion power can easily get us out even in the most difficult situations.  Need to develop discretion power!

The very first step in spirituality begins with discernment.  Knowing what is right, what is wrong, what is good, what is bad, what is beneficial, what is harmful, what moves me forward, what does not move me, the ability to differentiate between  must have!

विवेक की शक्ति के बिना, क्या हम किसी भी और शक्ति का सही से उपयोग कर सकते हैं, जैसे-शारीरिक शक्ति, धन की शक्ति, रिश्तों की शक्ति?

मुसीबत का सामना

एक गाँव में एक बढ़ई रहता था। वह शरीर और दिमाग से बहुत मजबूत था।

एक दिन उसे पास के एक शहर से अमीर आदमी ने फर्नीचर बनवाने के लिए अपने घर पर बुलाया।

जब वहाँ का काम खत्म हुआ तो लौटते वक्त शाम हो गई। बस ने तो गाँव के बाहर उतार दिया। उसने काम के मिले पैसों की एक पोटली बगल में दबा ली और ठंड से बचने के लिए शॉल ओढ़ लिया।

वह चुपचाप सुनसान रास्ते से घर की और रवाना हुआ। कुछ दूर जाने के बाद अचानक उसे एक लुटेरे ने रोक लिया।

लुटेरा शरीर से तो बढ़ई से कमजोर ही था, पर उसकी कमजोरी को उसकी बंदूक ने ढक रखा था।

अब बढ़ई ने उसे सामने देखा तो लुटेरा बोला, जो कुछ भी तुम्हारे पास है, सभी मुझे दे दो, नहीं तो मैं तुम्हें गोली मार दूँगा।

यह सुनकर बढ़ई ने पोटली उस लुटेरे को थमा दी और बोला, ठीक है, यह रुपये तुम रख लो, मगर मैं घर पहुँच कर अपनी बीवी को क्या कहूँगा। वह तो यही समझेगी कि मैंने पैसे जुए में उड़ा दिए होंगे।

तुम एक काम करो, अपनी बंदूक की गोली से मेरी टोपी में एक छेद कर दो ताकि मेरी बीवी को लूट का यकीन हो जाए।

लुटेरे ने बड़ी शान से बंदूक से गोली चलाकर टोपी में छेद कर दिया। अब लुटेरा जाने लगा तो बढ़ई बोला, एक काम और कर दो, जिससे बीवी को यकीन हो जाए कि लुटेरों के गैंग ने मिलकर मुझे लूटा है। वरना मेरी बीवी मुझे कायर ही समझेगी। तुम इस शॉल में भी चार-पाँच छेद कर दो।” लुटेरे ने खुशी-खुशी शॉल में भी कई गोलियाँ चलाकर छेद कर दिए।

इसके बाद बढ़ई ने अपना कोट भी निकाल दिया और बोला, इसमें भी एक-दो छेद कर दो ताकि सभी गॉंव वालों को यकीन हो जाए कि मैंने बहुत संघर्ष किया था।

इस पर लुटेरा बोला, बस कर अब। इस बंदूक में गोलियाँ भी खत्म हो गई हैं।

यह सुनते ही बढ़ई आगे बढ़ा और लुटेरे को दबोच लिया और बोला, मैं भी तो यही चाहता था। तुम्हारी ताकत सिर्फ यह बंदूक थी। अब यह भी खाली है। अब तुम्हारा कोई जोर मुझ पर नहीं चल सकता है। चुपचाप मेरी पोटली मुझे वापस दे दो, वरना..

यह सुनते ही लुटेरे के होश उड़ गए और उसने तुरंत ही पोटली बढई को वापिस दे दी और अपनी जान बचाकर वहाँ से भाग गया।

बढ़ई की ताकत तब काम आई, जब उसने अपनी विवेक शक्ति का सही ढंग से उपयोग किया।

हमारी विवेक शक्ति हमें मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी आसानी से बाहर निकाल सकती हैं। जरूरत है विवेक शक्ति विकसित करने की!

आध्यात्मिकता में सबसे पहला कदम विवेकशीलता से शुरू होता है। यह जानना कि क्या सही है, क्या गलत, क्या अच्छा है, क्या बुरा, क्या फायदेमंद है, क्या नुकसानदेह, कौन-सी चीज मुझे आगे बढ़ाती है, कौन-सी नहीं बढ़ाती है, इनके बीच अंतर करने की क्षमता आरम्भ से ही जागृत होना आवश्यक है!

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