Sunday Story Special World Of Greed!

World of Greed

One day a daughter-in-law of the village was cleaning, there was betel nut in her mouth, when the peak came, she accidentally spit in the Yagyavedi.  He was surprised when his spit turned to gold.  Now every day she deliberately started spitting in the altar and gradually gold started growing near her.
The word spread rapidly among women, so many more women also started producing gold by spitting in their own home made Yagyavedi.  Gradually this became a common practice in the whole village.  Except for one woman, that woman was also provoked by many other women, explained, Oh!  why don’t you spit
Yes, the thing is that I will not do this work without my husband’s permission and as far as I know he will not.  But the rural women created such an environment that she finally asked her husband in fear one night.  Beware whoever does this, then what is the sacrificial offering to spit?
The woman became helpless in front of her husband’s thunderous warning, but due to the atmosphere and the discussions that took place, the sadhvi woman became very upset.  Especially aiming at his sore throat, other women showed their new throat-necklaces, then she started dissolving in the inner conflict.  The busyness of the husband and the blasphemy of the women would have put him in religious trouble.
Maybe it is my misfortune, or the sin of some previous birth, that despite being a sati woman, I have to yearn for even a single rattle of sleep.  Maybe it’s my husband’s wrong decision, oh!  What has this Dharmacharan given to me?
Why should I follow the rule by which my heart keeps getting hurt?  And it happened that she started getting sick.  Husband found this disease and one day he decided to leave his family village in Brahma Muhurta itself.  They left after putting everything in the car.  They wanted to go far before sunrise.
But!  Hey !  What is this ?  As soon as they came out of the kankar (border) of the village!  There was a terrible explosion behind.  The whole village was burning in smoke.  The gentleman couple were stunned.  Now that woman understood the importance of her husband.  In fact, the village survived for so long, only because his family was in the periphery of the village.

Lesson:-
Keep practicing religion, in the greed of getting something, a person loses a lot.  So avoid greed..!!

लालच की दुनिया

एक दिन गाँव की एक बहू सफाई कर रही थी, मुँह में सुपारी थी पीक आया तो उसने गलती से यज्ञवेदी में थूक दिया। उसे आश्चर्य तब हुआ जब उसका थूक स्वर्ण में बदल गया। अब तो वह प्रतिदिन जान बूझकर वेदी में थूकने लगी और उसके पास धीरे-धीरे स्वर्ण बढ़ने लगा।
महिलाओं में बात तेजी से फैलती है, इसलिए कई और महिलाएं भी अपने-अपने घर में बनी यज्ञवेदी में थूक-थूक कर सोना उत्पादन करने लगीं। धीरे-धीरे पूरे गाँव में यह सामान्य चलन हो गया। सिवाय एक महिला के, उस महिला को भी अनेक दूसरी महिलाओं ने उकसाया, समझाया, अरी ! तू क्यों नहीं थूकती ?
जी, बात यह है कि मैं अपने पति की अनुमति बिना यह कार्य हर्गिज नहीं करूँगी और जहाँ तक मुझे ज्ञात है वह अनुमति नहीं देंगे। किन्तु ग्रामीण महिलाओं ने ऐसा वातावरण बनाया कि आखिर उसने एक रात डरते-डरते अपने पति को पूछ ही लिया। खबरदार जो ऐसा किया तो, यज्ञवेदी क्या थूकने की चीज़ है ?
पति की गरजदार चेतावनी के आगे बेबस वह महिला चुप हो गई पर जैसा वातावरण था और जो चर्चाएँ होती थी, उनसे वह साध्वी स्त्री बहुत व्यथित रहने लगी। खास कर उसके सूने गले को लक्ष्य कर अन्य स्त्रियाँ अपने नए-नए कण्ठ-हार दिखाती तो वह अन्तर्द्वन्द में घुलने लगी। पति की व्यस्तता और स्त्रियों के उलाहने उसे धर्मसंकट में डाल देते।
यह शायद मेरा दुर्भाग्य है, अथवा कोई पूर्वजन्म का पाप कि एक सती स्त्री होते हुए भी मुझे एक रत्ती सोने के लिए भी तरसना पड़ रहा है। शायद यह मेरे पति का कोई गलत निर्णय है, ओह ! इस धर्माचरण ने मुझे दिया ही क्या है ?
जिस नियम के पालन से दिल कष्ट पाता रहे उसका पालन क्यों करूँ ? और हुआ यह कि वह बीमार रहने लगी। पतिदेव इस रोग को ताड़ गए और उन्होंने एक दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही सपरिवार ग्राम त्यागने का निश्चय किया। गाड़ी में सारा सामान डालकर वे रवाना हो गए। सूर्योदय से पहले-पहले ही वे बहुत दूर निकल जाना चाहते थे।
किन्तु ! अरे ! यह क्या ? ज्यों ही वे गाँव की कांकड़ (सीमा) से बाहर निकले ! पीछे भयानक विस्फोट हुआ। पूरा गांव धू-धू कर जल रहा था। सज्जन दम्पत्ति अवाक् रह गए। अब उस स्त्री को अपने पति का महत्त्व समझ आ गया। वास्तव में, इतने दिन गाँव बचा रहा, तो केवल इस कारण कि उसका परिवार गाँव की परिधि में था।

शिक्षा:-
धर्मांचरण करते रहें, कुछ पाने के लालच में इंसान बहुत कुछ खो बैठता है। इसलिए लालच से बचें..!!

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